दुख़ आँसू वगेरा वगेरा

Just for a change, and I have almost forgotten writing devanagari lipi (these fonts below). Read it at your own risk. Disclaimer towards the bottom of the post. 


 

हम चार लोग एक फ्लॅट में रहा करते थे, और मेरा उम्र सब से कम|

हमारा फ्लॅट के दो कमरो के एक में शॅंकीचाचा और अजय मामा रहते थे, दूसरे कमरे में प्राजीश चाचा और मैं रहता है| ‘शंकी पॅंकी’ हमे छोड़ कर जा रहा था| उसे कही और दूसरा काम मिल गया था| प्राजीश चाचा का गाव जाने का समय आगत हो चुका था| वे पता नही कितने दिनो के लिए, पर छुट्टी पर चल बसे| बचा था शंकी चाचा, अजय मामा आंड मी|

 

प्राजीश चाचा के जाने के ठीक १३ दिन बाद ‘शांकी पनकी’ का हमारे कंपनी में आखरी दिन था| ‘शंकी पनकी’ निकल पड़े अपने नये काम के दौरान| बड़ी दुख की बात थी क्यूंकी शंकी हमारा नेता जैसा था| चाहे दारू हो या सोशियलाइज़िंग, शंकी का कोई प्रतियोगी नही| अँग्रेज़ी बोलने में थोड़ी परेशानी होती थी पर चलो यार हम अँग्रेज़ तो नही हें| हम हिन्दुस्तान के क़िस्सी गाव के पेड़ पर चढ़ लेते थे कभी किसी नदी मे गोता लगा लेते, पर स्कूल में अँग्रेज़ी कभी गौर से नही स्टडी की|

 

शंकी के होते हुए मैं कभी अजय मामा से ज़्यादा बात नही किया करता था| इसका मतलब यह नही की हम पराए थे| बस यही की शंकी का टाँग खीचने और हँसी मज़ाक में मैं उलजा रहता था| अजय मामा का ड्यूटी भी रात की हुआ करती थी| एक बार शंकी जो चला गया, हमारे फ्लॅट में सूनापन छा गया| अजय मामा मेरे ख़याल में सिर्फ़ तीन चीज़ें करते थे, अपनी पत्नी का फोन पर याद करना, दारू पीकर सो जाना और टीवी सीरियल देखना| अजय मामा की किस्मत अची नही क्यूंकी मेरा दारू के प्रति दिलचस्पी बहुत कम, या फिर नही ही कह लो| यह बात भी है की शंकी और अजय मामा २ साल से साथ दारू पीते आए है| आज अचानक शंकी चाचा नही| दारू में जो यारी बनती है, वो साधारण यारीऔर दोस्ती से कई गुना मजबूत है| कई गुना|

 

यही समझ में थोड़े दिनो तक मैं भी चुप रहा| कभी कुछ बातें होती थी मगर देखा जाए तो घर में सन्नाटा छा गया था| कभी लगता था क्या उस कमरे मे कुछ और तो नही चल रहा था जो मैं नही जानता? फिर कुछ और दिन गुज़रे, हालत तो वही| मैं अब सोच में पद गया की शंकी ने क्या दिया या किया जो मैं नही दे पाया/ पा रहा था| 😛 या फिर क्या वे दोनो….. :ओ :ओ |

 

आख़िर आज अजय मामा ने दिल की बातें बता दी| शंकी जाने से उन्हे उतना ही दुख हुआ जितना मुझे हुआ है, मतलब ज़्यादा नही :प पर वे अपना फॅमिली यहा ना होंने का दर्द महसूस कर रहे है| इस फ्लॅट लेने से पहले हम सब अलग रहा करते थे, शंकी अलग, मैं अलग और अक़ेला, अजय मामा अपने फॅमिली के साथ, प्राजीश चाचा भी अपने फॅमिली के साथ| अब अजय मामा और प्राजीश चाचा के घरवाले यहा नही| अफ़सोस! शंकी सोशियल आदमी होने के नाते शायद कुछ जादू किया और मामा बोलने लगे| अजय मामा यह भी बोले की अगर कर्ज़ का भोज उतर जाता तो पक्का वे अपने गाव चले जाते| काश!

 

लाइफ इस नोट फेर!!! (LIFE IS NOT FAIR!!!)


 

This is a quick story of me and my new roommates Shanky-panky, Ajay and Pra–esh (long name,Phew!). Kindly ignore the grammar, spelling and other mistakes. It’s been a while I have written Hindi/Marathi, and I am not even going to proof read this 😛

Thanks to http://www.shabdkosh.com for some words and http://www.quillpad.in/ for allowing me to type Devanagari. 

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44 thoughts on “दुख़ आँसू वगेरा वगेरा”

      1. Haha 😀 not sarcasm babaji!!!
        Hum aapko as respect babaji bulate hai! Not out of old age! 😛
        That way i call my colleagues bhi maata ji and subah subah tell them pranam, namaste and aadar satkaar maata ji karke!! 😀 😛

      2. In this times when Indian sanskar is getting beaten up by the youth, I think you and Aloknath ji are the only people protecting it. Shouldn’t we be proud?

      1. Simple : We are 4 people initially staying in a big apartment, shankly leaves, ajay mamma is depressed. I think shanky and ajay mamma were having an illicit relation but alas ajay mamma is worried about his family. Life is not fair.

    1. imagine the pain I went through typing this. I was literally thinking how I can come up with some words 😛 The online editor wouldn’t understand.

  1. Oh my god! I’m glad I went through your blog otherwise I would have missed this wonderful piece. Although there were few mistakes but as you said in the disclaimer, I ignored them 😉 All in all, it was a fun read. 🙂

    1. I was sure about the mistakes 😛 Hindi is something I haven’t written in decades, and speak very little now-a-days.

      Thank you for ignoring 😀

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